नई दिल्ली। चीन के वैश्विक दबदबे को चुनौती देने की दिशा में ट्रंप प्रशासन ने बड़ा रणनीतिक कदम उठाने के संकेत दिए हैं। वाशिंगटन में आयोजित विदेश मंत्रियों की अहम बैठक के दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक ऐसे रोडमैप का खुलासा किया, जिससे चीन के क्रिटिकल मिनरल्स पर एकाधिकार को सीधे तौर पर कमजोर किया जा सके। इसके तहत अमेरिका अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर एक नया ‘क्रिटिकल मिनरल्स ट्रेडिंग ब्लॉक’ बनाने की तैयारी में है।
टैरिफ से तय होगा मिनरल्स का न्यूनतम दाम
प्रस्तावित ट्रेडिंग ब्लॉक का मुख्य उद्देश्य टैरिफ यानी शुल्क के जरिए खनिजों की कीमतों के लिए एक ‘प्राइस फ्लोर’ तय करना है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि वैश्विक बाजार में खनिजों की कीमतें एक तय स्तर से नीचे न गिरें और सहयोगी देशों के उद्योगों को नुकसान न हो।
चीन की मार्केट फ्लडिंग रणनीति पर लगेगी लगाम
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि चीन अक्सर बाजार में खनिजों की भारी सप्लाई कर कीमतों को जानबूझकर गिरा देता है, जिससे अन्य देशों की कंपनियां प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पातीं। प्रस्तावित ट्रेडिंग ब्लॉक सदस्य देशों को इस तरह की ‘मार्केट फ्लडिंग’ रणनीति से सुरक्षा कवच प्रदान करेगा। वेंस के मुताबिक, यह ब्लॉक अमेरिकी औद्योगिक क्षमता तक भरोसेमंद पहुंच सुनिश्चित करेगा और पूरे क्षेत्र में उत्पादन के विस्तार को बढ़ावा देगा।
क्या कम होगी चीन पर निर्भरता?
क्रिटिकल मिनरल्स आज स्मार्टफोन, इलेक्ट्रिक वाहन से लेकर जेट इंजन तक के निर्माण के लिए अनिवार्य हो चुके हैं। मौजूदा समय में चीन दुनिया के करीब 70 प्रतिशत खनन और लगभग 90 प्रतिशत प्रोसेसिंग पर नियंत्रण रखता है। इसी निर्भरता को घटाने के लिए ट्रंप प्रशासन लगातार नए कदम उठा रहा है।
‘प्रोजेक्ट वाल्ट’ से बनेगा रणनीतिक भंडार
इसी कड़ी में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दुर्लभ खनिजों के रणनीतिक भंडारण के लिए ‘प्रोजेक्ट वाल्ट’ योजना की घोषणा की है। इस योजना को यूएस एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक से 10 अरब डॉलर के ऋण और 1.67 अरब डॉलर की निजी पूंजी के जरिए वित्तपोषित किया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि यह पहल अमेरिका की सप्लाई चेन सुरक्षा को मजबूत करेगी और चीन पर निर्भरता को निर्णायक रूप से कम करने में मददगार साबित होगी।
